(Why Humans Keep Breathing Even When Conscious or Unconscious)
हम खाते हैं, बोलते हैं, चलते हैं — ये सब काम हम होश में रहकर करते हैं।
लेकिन एक काम ऐसा है जो हम होश में हों या बेहोश, जाग रहे हों या सो रहे हों, हर हाल में करते रहते हैं —
👉 साँस लेना।
प्रश्न उठता है:
हम साँस लेना क्यों नहीं भूलते?
और हम होश में होते हुए भी साँस अपने-आप क्यों लेते रहते हैं?
1. साँस लेना “याददाश्त” से नहीं, “जीवन प्रणाली” से चलता है
साँस लेना कोई ऐसा काम नहीं है जिसे दिमाग याद रखे।
यह हमारे शरीर की ऑटोमैटिक लाइफ सपोर्ट सिस्टम का हिस्सा है।
📌 इसे विज्ञान में कहते हैं:
Involuntary Process (अनैच्छिक क्रिया)
जैसे:
- दिल का धड़कना
- खून का बहना
- पाचन प्रक्रिया
वैसे ही साँस लेना भी अपने-आप चलता है।
2. दिमाग का कौन सा हिस्सा साँस चलाता है?
साँस लेने का कंट्रोल हमारे दिमाग के एक बहुत पुराने हिस्से के पास होता है:
🧠 Brainstem (विशेष रूप से Medulla Oblongata)
यह हिस्सा:
- सोचता नहीं
- सवाल नहीं करता
- बस जीवन बचाता है
➡️ इसे फर्क नहीं पड़ता कि आप खुश हैं, दुखी हैं, सो रहे हैं या बेहोश।
3. हम होश में होते हुए भी साँस क्यों लेते रहते हैं?
क्योंकि:
- शरीर को हर सेकंड ऑक्सीजन चाहिए
- और हर सेकंड कार्बन डाइऑक्साइड बाहर निकालनी होती है
अगर दिमाग पूछने लगे:
“अब साँस लें या नहीं?”
तो एक सेकंड की देरी भी जानलेवा हो सकती है।
इसलिए प्रकृति ने इसे
सोच से बाहर और
याददाश्त से अलग कर दिया।
4. क्या हम साँस को कंट्रोल कर सकते हैं?
हाँ, लेकिन सीमित समय के लिए।
आप:
- साँस तेज कर सकते हैं
- धीमी कर सकते हैं
- कुछ देर रोक सकते हैं
लेकिन जैसे ही ऑक्सीजन कम होती है:
➡️ दिमाग तुरंत नियंत्रण वापस ले लेता है।
अगर आप बेहोश हो जाएँ:
- साँस फिर से अपने-आप चलने लगती है
➡️ क्योंकि जीवन, आपकी मर्ज़ी से ज़्यादा ज़रूरी है।
5. नींद में साँस क्यों चलती रहती है?
नींद में:
- हमारा चेतन मन (Conscious Mind) बंद हो जाता है
- लेकिन अवचेतन मन (Subconscious) और ब्रेनस्टेम सक्रिय रहता है
इसलिए:
- हम सपने देखते हैं
- दिल धड़कता रहता है
- साँस चलती रहती है
अगर साँस याद रखने वाली चीज़ होती:
इंसान नींद में कभी नहीं जागता।
6. जन्म के समय पहली साँस कैसे आती है?
बच्चे को कोई सिखाता नहीं कि:
“अब साँस लो”
जैसे ही बच्चा माँ के गर्भ से बाहर आता है:
- तापमान बदलता है
- ऑक्सीजन की ज़रूरत पैदा होती है
- दिमाग अपने-आप साँस चालू कर देता है
➡️ यह सिस्टम जन्म से पहले ही तैयार होता है।
7. साँस लेना भूलना = मृत्यु
यही सबसे बड़ा कारण है।
प्रकृति का नियम है:
जो चीज़ जीवन के लिए अनिवार्य है,
उसे भूलने की अनुमति नहीं दी जाती।
इसलिए:
- खाना भूल सकते हैं
- रास्ता भूल सकते हैं
- नाम भूल सकते हैं
लेकिन:
❌ साँस लेना नहीं भूल सकते
8. आध्यात्मिक दृष्टि से साँस का अर्थ
योग और ध्यान में साँस को कहा गया है:
- प्राण
- जीवन ऊर्जा
कहा जाता है:
“साँस शरीर को जोड़ती है आत्मा से”
इसीलिए ध्यान में साँस पर ध्यान दिया जाता है —
क्योंकि वही एक चीज़ है जो:
- शरीर में भी है
- और अपने-आप चलती भी है
हम होश में हों या न हों, साँस लेते रहते हैं क्योंकि:
✔️ यह याददाश्त नहीं, सिस्टम है
✔️ यह सोच से नहीं, जीवन से जुड़ा है
✔️ इसे भूलना मृत्यु को बुलाना है
साँस हम नहीं लेते —
साँस हमें ज़िंदा रखती है।
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