यह प्रश्न अक्सर बहस का विषय रहा है कि कॉमन सेंस (सामान्य बुद्धि) ने धर्म को जन्म दिया या धर्म ने कॉमन सेंस और मानवता को गढ़ा। इस पर स्पष्ट रूप से सोचने के लिए हमें तीनों को अलग-अलग समझना होगा और फिर उनके आपसी संबंध को देखना होगा।
1. सबसे पहले: मानवता (Humanity)
इतिहास और मानव-विज्ञान (Anthropology) के अनुसार मानवता सबसे पहले आई।
जब इंसान जंगलों, गुफाओं और खुले मैदानों में रहता था, तब न तो संगठित धर्म थे और न ही धार्मिक ग्रंथ।
उस समय भी इंसान में कुछ मूल भाव मौजूद थे:
- भूख लगने पर भोजन ढूँढना
- खतरे से बचना
- बच्चों की रक्षा करना
- समूह में रहना
यही मानवता की प्रारंभिक अवस्था थी — जीवन को बचाने और आगे बढ़ाने की कोशिश।
2. फिर आया: कॉमन सेंस (Common Sense)
जैसे-जैसे अनुभव बढ़ा, इंसान ने सीखा:
- आग से गर्मी और सुरक्षा मिलती है
- हिंसा से नुकसान होता है
- सहयोग से जीवन आसान होता है
यही अनुभव-आधारित समझ कॉमन सेंस कहलाती है।
👉 उदाहरण:
- “झगड़ा करने से नुकसान होगा”
- “सच बोलने से भरोसा बनता है”
- “मिल-जुलकर रहने से समाज मजबूत होता है”
यह सब धर्म से पहले था।
कॉमन सेंस अनुभव + बुद्धि से पैदा हुआ।
3. उसके बाद आया: धर्म (Religion)
जब समाज बड़ा हुआ और सवाल गहरे हुए, जैसे:
- मौत के बाद क्या है?
- प्रकृति इतनी शक्तिशाली क्यों है?
- सही और गलत का नियम कौन तय करे?
तब धर्म का जन्म हुआ।
धर्म ने:
- नैतिक नियम बनाए
- समाज को अनुशासन दिया
- कॉमन सेंस और मानव मूल्यों को कहानियों, प्रतीकों और ईश्वर की अवधारणा में बाँधा
👉 यानी धर्म ने कॉमन सेंस को संगठित और संरक्षित किया।
4. तो पहले कौन आया?
संक्षेप में:
- मानवता – जीवन जीने की मूल प्रवृत्ति
- कॉमन सेंस – अनुभव से उपजी समझ
- धर्म – उस समझ को नियम, विश्वास और परंपरा में ढालने की कोशिश
➡️ धर्म ने कॉमन सेंस को बनाया नहीं, बल्कि उसे व्यवस्थित किया।
5. एक महत्वपूर्ण बात
धर्म अपने मूल रूप में:
- करुणा
- सत्य
- अहिंसा
- सहयोग
जैसे मूल्यों को बढ़ावा देता है — जो पहले से ही मानवता और कॉमन सेंस में मौजूद थे।
समस्या तब होती है जब:
- धर्म सवालों से ऊपर रख दिया जाता है
- कॉमन सेंस को दबा दिया जाता है
कॉमन सेंस और मानवता धर्म से पहले आए।
धर्म एक सामाजिक संरचना है, जो मानव अनुभव और सामान्य बुद्धि से ही निकली है।
अगर धर्म कॉमन सेंस के साथ चले — तो वह मार्गदर्शक बनता है।
और अगर कॉमन सेंस को छोड़ दे — तो वह टकराव का कारण बनता है।
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