Philosophy

पाप-पुण्य, जाति-धर्म, स्वर्ग-नर्क: वास्तविकता है या कल्पना?

आजकल सोशल मीडिया पर एक सवाल बार-बार घूमता रहता है – “पाप-पुण्य, जाति, धर्म, स्वर्ग, नरक ये सब सच हैं […]

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श्रद्धा, अंधश्रद्धा और अंधविश्वास – तीनों में अंतर समझिए

हम रोज़ाना ये तीन शब्द सुनते हैं – श्रद्धा, अंधश्रद्धा, अंधविश्वास – और ज्यादातर लोग इन्हें एक ही मान लेते

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एक तार्किक दृष्टिकोण से ईश्वर और धर्म पर कुछ गहरे, लेकिन विनम्र प्रश्न

यह लेख किसी धर्म या आस्थावान व्यक्ति की भावनाओं को ठेस पहुँचाने के लिए नहीं लिखा गया है। यह केवल

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ईश्वर, धर्म और जीवन पर कुछ शांतिपूर्ण, गहरे सवाल ~ जिन पर हर सोचने वाला व्यक्ति कभी न कभी रुकता है ~

ये प्रश्न किसी धर्म या आस्था को गलत साबित करने के लिए नहीं हैं। ये वे सवाल हैं जो बचपन

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चार्वाक / लोकायत दर्शन: भारत का प्राचीन भौतिकवादी एवं प्रत्यक्षवादी मत — जो आज भी तर्क और प्रमाण की महत्ता सिखाता है

परिचय भारतीय दर्शन की विशाल परंपरा में जहाँ अधिकांश मत आत्मा, ईश्वर, कर्म व मोक्ष की चर्चा करते हैं, वहीं

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Existentialism और Stoicism — जीवन को समझने के दो शक्तिशाली मार्ग

दुनिया में दो तरह की समस्याएँ हैं —एक वे जो हम पर हावी होती हैं,और दूसरी वे जिन पर हम

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Absurdism और Sisyphus की कहानी — अर्थहीनता के बावजूद जीवन को गले लगाना

क्या जीवन का कोई असली अर्थ है?या हम अर्थ खोजने की कोशिश करके खुद को धोखा दे रहे हैं? इन

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Nihilism और Absurdism — क्या जीवन वास्तव में अर्थहीन है?

मनुष्य हमेशा से अर्थ, उद्देश्य, सत्य और अस्तित्व जैसे प्रश्नों में उलझा रहा है।हम क्यों पैदा होते हैं? हम किस

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